alok kumar singh ballia

Thursday, 20 January 2011

क्या हुआ जो आज कोई ख्याल नहीं आया ...,

स्मृति में पूजा के .....,
आज तुममे,
न वो नशा रहा...ना वो ताकत जो मुझको उलझा सके ...,
न धड़कन बढ़ी ..,न सांसें जो मुझको वहां बांध सके ...,
न बदले वो कदम हमारे ..,न बदली है राह ...,
न बदली वो चाह ही मेरी ...न बदली वो राह...,
बदल गयी है जाम हमारी..बदल गए हैं नाम ...,
एक तू थी पहचान हमारी ...अब तुझसे बदनाम ...,
कुछ दिन चाँद थी फलक पर मेरे..हो गयी गुमनाम॥,
और
खो गया अतीत में तेरे, मै-तू कोई ना और इन्सान ...
भूल जा सारे गम तू तेरे,फिर मुझे पहचान ॥,
चाह थी मोहब्बत की राह में चलना..पहुंचा दिया शमशान
यूँ मुझे कभी याद भी कर,मैं भी था इन्सान ॥,

बदल दिया तुने मुझको,ये भी तू अब जान॥,
गली भी तेरी बदनाम सी लगती..जो कोई लेता नाम ...,
ना वो बात रही तुझे में अब..जो थी मेरी जान॥,
दिख रही मुझको जैसे तू--जाती हुई शमशान ॥,


अलोक कुमार सिंह "अम्बर"
[स्वामी विवेकानंद कालोनी]तिखमपुर,
बलिया ,(उत्तर प्रदेश)