alok kumar singh ballia

Creation's of other's

दिल की बातें, इश्क के किस्से, मुहब्बत की कहानी कही जाये,
जुबां कहते घबराये, तो क्यूँ न अशआरों की जुबानी कही जाये....

वैसे तो मुझे उसके छोड़ जाने का कुछ भी असर न हुआ,
बस एक दिल जो सीने में धड़कता था वो ढूंढें नहीं मिलता....

उलझी हुई बातें, परेशा आँखे, इतनी पहले कभी न थी,
शायद ढूंढ रहा है, वो तर्क-ऐ-वफ़ा के बहाने आजकल...

दोस्तों के फरेब अब और गिने नहीं जाते हमसे ,
सितारों की गिनती आसान लगने लगी अचानक.......

ख़त उसका क़ासिद के हाथ देखकर खुश न हो,
तर्क-ऐ-वफ़ा का उसने कहीं पैग़ाम भेजा न हो....

कोई बहाना तो उसे भूलने का मिले,
याद आने के इतने बहानों के दरमियाँ.....

आज न जाने इश्क का बीमार कैसा होगा,
जो कल उसे भूलने का वादा कर आया था...

ये जरुरी तो नहीं कि हर सितम पे उनके कुछ कहा जाये,
उनकी रुसवाई न हो ये सोचकर अच्छा है चुप रहा जाये...

बैठे बिठाये बेवजह की मोल हमने मुसीबत ले ली,
अपने ख्वाब से बदलकर जब उसकी हकीकत ले ली...

मुद्दतों हमने उसके पैग़ाम का रास्ता देखा,
आखिर हमें ही अपना रास्ता बदलना पड़ा...

कहे नहीं जाते उसके अलावा जज़बात अब किसी से,
अब वो बिचारा भी इतनी फुरसतें कहाँ से लाये मेरे लिए....

अब उससे वफ़ा की उम्मीद ही बेकार है विशेष,
मैं यूँ भी उसकी उसकी हर अदा पे कुर्बान ही तो हूँ.


वो दो पल के लिए मिला, मैं उम्र भर की आस लिए बैठा था,
शबनम पिला गया मुझको, मैं समंदर सी प्यास लिए बैठा था......

हम उसे डगमगाकर गिरते हुए देखा किये, संभाल सकते थे, वो इतना भी तो दूर न था,
क्या करे, लेकिन, गैरो पे भरोसा करने वाले को, अपनों का ही सहारा मंजूर न था...

Harjeet Singh ji