alok kumar singh ballia

Friday, 23 September 2011

अभी भी गुस्सा हो

"बड़ी लालिमा बिखर गयी आज की शाम में
सूरज डूब रहा है,या तुम अभी भी गुस्सा हो"
"और कब तलक तेरे यादों में जलता रहूँ....
मेरी याद-में एक शम्मा तुम-भी जलाया करो"
 
आखिरी मंजिल मौत है जिंदगी की,
इसी खातिर बस मोहब्बत की तुझे-से,
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जिंदगी ना बनाया
 "बहुत वक़्त तेरा इंतज़ार किया था,
मुझे उम्मीद थी,पर जिंदगी थक गयी "
 

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